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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 : भक्ति योग | सभी श्लोक हिंदी एवं English अर्थ सहित

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  श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 – भक्ति योग सभी श्लोक हिंदी एवं English अर्थ सहित   श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 भक्ति योग है। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को भक्ति मार्ग, साकार-निराकार उपासना और प्रिय भक्त के गुण बताते हैं। सभी श्लोक अलग-अलग पूर्ण […]

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11,Bhagavad Gita Chapter 11, Vishwaroop Darshan Yog, Lord Krishna Universal Form, विश्वरूप दर्शन योग, Krishna Arjuna Samvad, Divine Vision of God, Gita Chapter 11 Summary

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 – विश्वरूप दर्शन योग

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    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 – विश्वरूप दर्शन योग सभी श्लोक हिन्दी अर्थ सहित   श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 11 : विश्वरूप दर्शन योग में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को अपना विश्वरूप दिखाया। इस अध्याय में भगवान की सर्वव्यापकता, महिमा और दिव्य स्वरूप

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 – विभूति योग सभी श्लोक हिन्दी अर्थ सहित

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  श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 – विभूति योग सभी श्लोक हिन्दी अर्थ सहित   श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 : विभूति योग में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य विभूतियों का वर्णन किया है। श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 में भगवान ने अर्जुन को अपनी महिमा,

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 – राजविद्याराजगुह्ययोग

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    🪔 श्रीमद्भगवद्गीता: अध्याय ९ – राजविद्या राजगुह्य योग श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 9 भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को राजविद्या (सर्वोत्तम ज्ञान) और राजगुह्य (सर्वगोपनीय रहस्य) का उपदेश देते हैं। सभी 42 श्लोक पूर्ण संस्कृत में , हिंदी और English अर्थ सहित।

श्रीमद् भगवद्गीता अध्याय 8 : अक्षर ब्रह्म योग

श्रीमद् भगवद्गीता अध्याय 8 : अक्षर ब्रह्म योग

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    श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय ८ अक्षरब्रह्मयोग भगवद्गीता का आठवाँ अध्याय ‘अक्षरब्रह्मयोग’ के नाम से जाना जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को परब्रह्म, आत्मा, समाधि और भगवान के धाम की महिमा के बारे में बताते हैं। इस

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 – सभी श्लोक हिंदी अर्थ सहित | गीता नीति

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    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग सभी श्लोक हिन्दी अर्थ सहित श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय, ज्ञान विज्ञान योग में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी प्रकृति, माया, और भक्तों के प्रकारों का वर्णन किया है। इस अध्याय में भगवान ने

श्री गोविंद दामोदर स्तोत्रम्-श्री बिल्व मंगल द्वारा रचित

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श्री गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् — अर्थ सहित रचयिता: परम्परा में श्री बिल्वमंगल ठाकुर (लीलाशुक) से संबद्ध | पाठ: देवनागरी | सरल हिंदी अर्थ कैसे पढ़ें? हर पद के अंत में आने वाला रिफ्रेन “गोविन्द दामोदर माधवेति।” जिह्वा-स्मरण का निरंतर आग्रह

श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6 ध्यान yoga

श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6: आत्मसंयम योग सभी 47 श्लोक और हिंदी अर्थ

श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6: आत्मसंयम योग सभी 47 श्लोक और हिंदी अर्थ Read More »

  श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6 ध्यान योग – सभी 47 श्लोक और हिंदी अर्थ श्रीमद भगवद गीता का छठा अध्याय, जिसे आत्मसंयम योग या ध्यान योग के नाम से जाना जाता है, ध्यान और आत्म-नियंत्रण के महत्व को दर्शाता