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निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से

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  निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म करने की प्रेरणा दी, परंतु फल की इच्छा के बिना। इसे ही निष्काम कर्म कहा गया है। […]

FEATURED DAILY SHLOKA

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GeetaNiti.in भगवद गीता से प्रेरणा लें, हर दिन एक नई शुरुआत करें 🌸 Featured Shloka – श्लोक 2.47 🌸 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। इसलिए

Decode Dharma: learn Sanskrit and Hindi language for scriptures

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Decode Dharma: संस्कृत और हिंदी की मूल बातें गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों की गहराई को समझें हमारे शुरुआती स्तर के कोर्स के साथ! भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47): कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। अर्थ: तुम्हारा अधिकार

श्रीमद् भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या

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    भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या GeetaNiti.in पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भगवद्गीता सनातन धर्म का सार है जिसे विभिन्न संतों, चिंतकों और योगियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से समझाया है। प्रस्तुत है 10 प्रमुख व्याख्याएं: 1. आदि शंकराचार्य

Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

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  जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप

गीता के अनुसार कर्म का महत्व

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WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 : सांख्य योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 : सांख्य योग श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में

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    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 : सांख्य योग यहाँ भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय के सभी ७२ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ संजय उवाच:दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्॥ संजय ने

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 अर्जुन विषाद योग

भगवद्गीता अध्याय 1 : अर्जुन विषाद योग

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श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1अर्जुन विषाद योग कुल श्लोक: 47 | संस्कृत मूल + हिंदी + अंग्रेजी अर्थ सहित 📖 श्लोक सूची श्लोक संख्या वक्ता मुख्य विषय 1-11 धृतराष्ट्र/दुर्योधन सेनाओं का वर्णन 12-19 भीष्म/पांडव शंखनाद 20-47 अर्जुन/संजय अर्जुन का विषाद श्लोक

Vibrant depiction of Lord Ganesha statue adorned with gold and bright colors for the Ganesh Chaturthi festival.

🪔 “जब जीवन उलझता है, तब गीता सुलझाती है”✍️Shubhhamm 🌿

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हम सभी की ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं जब सब कुछ धुंधला लगने लगता है। न रिश्तों की समझ होती है, न काम की दिशा, न भावनाओं का उत्तर स्पष्ट होता है।हम भीतर ही भीतर एक असहज युद्ध लड़ते