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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 : कर्म योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 : कर्म योग श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में

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श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय ३: कर्म योग यहाँ श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 के सभी ४३ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ अर्जुन उवाच: ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन। तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव॥ अर्जुन […]

Shiv Panchakshari Stotram (in Hindi)

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  शिव पंचाक्षरी स्तोत्रम शिव पंचाक्षरी स्तोत्रम आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक पवित्र भक्ति भजन है, जो भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र “नमः शिवाय” पर आधारित है। यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का गुणगान करता है और उनके आशीर्वाद

श्री शिव तांडव स्तोत्र: भगवान शिव की महिमा में रचित रावण कृत शक्तिशाली स्तुति

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  श्री शिव तांडव स्तोत्र: भगवान शिव की महिमा में रचित रावण कृत शक्तिशाली स्तुति श्री शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और शक्ति को दर्शाने वाली एक अनुपम भक्ति रचना है, जिसे लंकापति रावण ने रचा था। यह

SHIV CHALISA FULL

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    श्री शिव चालीसा: भगवान शिव की भक्ति में डूबें, पाठ और अर्थ सहित     श्र शिव चालीसा भगवान शिव की महिमा और कृपा को समर्पित एक शक्तिशाली भक्ति रचना है। यह चालीसा भक्तों के लिए शांति, समृद्धि

Mahabharat

Mahabharat whole story in short

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Mahabharat whole story in short महाभारत की संक्षिप्त  कहानी, पात्र और दर्शन महाभारत क्या है? महाभारत विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य और हिंदू धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसे स्मृति वर्ग में रखा जाता है। यह भारत का धार्मिक,

भगवान श्री कृष्ण चन्द्र का सम्पूर्ण जीवन सार

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  श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवनी जन्म और प्रारंभिक जीवन श्रीकृष्ण, जिन्हें भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है, का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा में हुआ था।

निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से

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  निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म करने की प्रेरणा दी, परंतु फल की इच्छा के बिना। इसे ही निष्काम कर्म कहा गया है।

FEATURED DAILY SHLOKA

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GeetaNiti.in भगवद गीता से प्रेरणा लें, हर दिन एक नई शुरुआत करें 🌸 Featured Shloka – श्लोक 2.47 🌸 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। इसलिए

Decode Dharma: learn Sanskrit and Hindi language for scriptures

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Decode Dharma: संस्कृत और हिंदी की मूल बातें गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों की गहराई को समझें हमारे शुरुआती स्तर के कोर्स के साथ! भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47): कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। अर्थ: तुम्हारा अधिकार

श्रीमद् भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या

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    भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या GeetaNiti.in पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भगवद्गीता सनातन धर्म का सार है जिसे विभिन्न संतों, चिंतकों और योगियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से समझाया है। प्रस्तुत है 10 प्रमुख व्याख्याएं: 1. आदि शंकराचार्य