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    Mahabharat whole story in short

    ByShubham July 25, 2025February 2, 2026

    Mahabharat whole story in short महाभारत की संक्षिप्त  कहानी, पात्र और दर्शन महाभारत क्या है? महाभारत विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य और हिंदू धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसे स्मृति वर्ग में रखा जाता है। यह भारत का धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक, और दार्शनिक ग्रंथ है, जिसमें लगभग एक लाख श्लोक हैं। इसे महर्षि वेद…

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    श्री हित प्रेमानंद जी महाराज की जीवनी

    ByShubham July 25, 2025August 9, 2025

      श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज की जीवनी जन्म और प्रारंभिक जीवन श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज, जिन्हें उनके भक्त प्रेमानंद जी महाराज के नाम से जानते हैं, का जन्म 30 मार्च 1969 को उत्तर प्रदेश के कानपुर के समीप सरसौल ब्लॉक के आखरी गाँव में एक सात्विक ब्राह्मण परिवार में…

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    भगवान श्री कृष्ण चन्द्र का सम्पूर्ण जीवन सार

    ByShubham July 25, 2025August 9, 2025

      श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवनी जन्म और प्रारंभिक जीवन श्रीकृष्ण, जिन्हें भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है, का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा में हुआ था। उनके माता-पिता वसुदेव और देवकी थे, जो मथुरा के यादव वंश से संबंधित थे। उस…

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    निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से

    ByShubham July 25, 2025July 28, 2025

      निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म करने की प्रेरणा दी, परंतु फल की इच्छा के बिना। इसे ही निष्काम कर्म कहा गया है। कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥– भगवद गीता 2.47 अन्य ग्रंथों में निष्काम कर्म…

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    FEATURED DAILY SHLOKA

    ByShubham July 24, 2025

    GeetaNiti.in भगवद गीता से प्रेरणा लें, हर दिन एक नई शुरुआत करें 🌸 Featured Shloka – श्लोक 2.47 🌸 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। इसलिए कर्म को फल की इच्छा से मत करो और न ही अकर्म में आसक्त हो।…

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    Decode Dharma: learn Sanskrit and Hindi language for scriptures

    ByShubham July 22, 2025August 4, 2025

    Decode Dharma: संस्कृत और हिंदी की मूल बातें गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों की गहराई को समझें हमारे शुरुआती स्तर के कोर्स के साथ! भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47): कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की चिंता कभी मत कर। न तो फल की…

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    श्रीमद् भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या

    ByShubham July 2, 2025July 28, 2025

        भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या GeetaNiti.in पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भगवद्गीता सनातन धर्म का सार है जिसे विभिन्न संतों, चिंतकों और योगियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से समझाया है। प्रस्तुत है 10 प्रमुख व्याख्याएं: 1. आदि शंकराचार्य (Adi Shankaracharya) अद्वैत वेदांत के प्रवर्तक शंकराचार्य ने गीता को आत्मा और ब्रह्म के एकत्व…

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    Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

    ByShubham June 27, 2025July 28, 2025

      जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप समझाऊंगा, जिसे जानकर तुम अशुभ (भ्रम और बंधन) से मुक्त हो जाओगे। जीवन का महत्वपूर्ण…

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    गीता के अनुसार कर्म का महत्व

    ByShubham June 27, 2025July 28, 2025

    WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और न ही अकर्मण्यता में आसक्ति रखो। जीवन का महत्वपूर्ण प्रश्न: मेरे कर्मों का उद्देश्य क्या…

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    भगवद्गीता द्वितीय अध्याय:सांख्य योग

    ByShubham June 25, 2025July 29, 2025

      श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय २: सांख्य योग यहाँ भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय के सभी ७२ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ संजय उवाच:दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्॥ संजय ने कहा: उस समय पाण्डवों की सेना को व्यूहरचित देखकर राजा दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास…

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