Skip to content
GEETANITI.IN A BHAGWATGEETA EXPLAINER

GeetaNiti.in

"गीता से नीति, नीति से जीवन"

  • Home
  • बाल्य दर्शन
  • स्तुति एवं आरती
  • भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ
  • ब्लॉग / लेख संग्रह
  • गीता सार/ अष्टादस अध्यायExpand
    • आधुनिक जीवन में गीता
    • नीति वचन एवं जीवन उपदेश
    • पुस्तकें,ऑडियो / वीडियो गैलरी
GEETANITI.IN A BHAGWATGEETA EXPLAINER
GeetaNiti.in
"गीता से नीति, नीति से जीवन"
  • Homepage: GeetanNiti | आधुनिक जीवन में गीता | गीता सार/ अष्टादस अध्याय | नीति वचन एवं जीवन उपदेश | ब्लॉग / लेख संग्रह | भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ | स्तुति एवं आरती

    गीता के अनुसार कर्म का महत्व

    ByShubham June 27, 2025July 28, 2025

    WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और न ही अकर्मण्यता में आसक्ति रखो। जीवन का महत्वपूर्ण प्रश्न: मेरे कर्मों का उद्देश्य क्या…

    Like this:

    Like Loading...

    Read More गीता के अनुसार कर्म का महत्वContinue

  • Homepage: GeetanNiti | गीता सार/ अष्टादस अध्याय | नीति वचन एवं जीवन उपदेश | भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ

    भगवद्गीता द्वितीय अध्याय:सांख्य योग

    ByShubham June 25, 2025July 29, 2025

      श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय २: सांख्य योग यहाँ भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय के सभी ७२ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ संजय उवाच:दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्॥ संजय ने कहा: उस समय पाण्डवों की सेना को व्यूहरचित देखकर राजा दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास…

    Like this:

    Like Loading...

    Read More भगवद्गीता द्वितीय अध्याय:सांख्य योगContinue

  • Homepage: GeetanNiti | गीता सार/ अष्टादस अध्याय | भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ

    भगवद्गीता अध्याय 1 : अर्जुन विषाद योग

    ByShubham June 25, 2025July 28, 2025

      श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1अर्जुन विषाद योग कुल श्लोक: 47 | अर्थ सहित श्लोक 1 धृतराष्ट्र उवाच |धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥1॥ अर्थ: धृतराष्ट्र बोले – हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्रित हुए मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया? श्लोक 2 सञ्जय उवाच |दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं…

    Like this:

    Like Loading...

    Read More भगवद्गीता अध्याय 1 : अर्जुन विषाद योगContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 2 3
  • Home
  • Disclaimer
  • Terms and conditions
  • Privacy Policy
  • Cookies Policy
  • About us
  • Contact us

Copyright © 2026 GeetaNiti.in. All Right Reserved. Made with 🧡 and devotion

  • Home
  • बाल्य दर्शन
  • स्तुति एवं आरती
  • भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ
  • ब्लॉग / लेख संग्रह
  • गीता सार/ अष्टादस अध्याय
    • आधुनिक जीवन में गीता
    • नीति वचन एवं जीवन उपदेश
    • पुस्तकें,ऑडियो / वीडियो गैलरी
 

Loading Comments...
 

    %d