श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय ३: कर्म योग
श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय ३: कर्म योग यहाँ भगवद्गीता के तृतीय अध्याय के सभी ४३ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ अर्जुन उवाच: ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन। तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव॥ अर्जुन ने कहा: हे जनार्दन! यदि आप बुद्धि को कर्म से श्रेष्ठ मानते हैं, तो…
