Filter posts by category

अध्याय 14 गुणत्रयविभाग योग, भगवद्गीता अध्याय 14, गीता अध्याय 14, गुणत्रयविभाग योग, सत्त्व रज तम, श्रीमद्भगवद्गीता, गीता श्लोक हिंदी अर्थ, प्रकृति पुरुष

अध्याय 14 गुणत्रयविभाग योग – श्रीमद्भगवद्गीता सभी श्लोक हिंदी अर्थ

अध्याय 14 गुणत्रयविभाग योग – श्रीमद्भगवद्गीता सभी श्लोक हिंदी अर्थ Read More »

  🌟 अध्याय 14: गुणत्रयविभाग योग 🌟 श्रीमद्भगवद्गीता – सभी 27 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् अध्याय 14 गुणत्रयविभाग योग का सार श्रीमद्भगवद्गीता के चौदहवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को सत्त्व, रजस, तमस् तीन गुणों […]

अध्याय 13 क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग, भगवद्गीता अध्याय 13, गीता अध्याय 13, क्षेत्र क्षेत्रज्ञ, श्रीमद्भगवद्गीता, गीता श्लोक हिंदी अर्थ, क्षेत्रज्ञ विभाग योग, गीता नीति, भगवान श्रीकृष्ण, अर्जुन संवाद

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग – श्रीमद्भगवद्गीता सभी श्लोक हिंदी अर्थ

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग – श्रीमद्भगवद्गीता सभी श्लोक हिंदी अर्थ Read More »

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग – श्रीमद्भगवद्गीता सभी श्लोक हिंदी अर्थ     🌟 श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 🌟 क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग कुल श्लोक: 34 | संस्कृत मूल + हिंदी + अंग्रेजी अर्थ सहित 📚श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 श्लोक सूची

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और उनके हिंदी अर्थ 

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और उनके हिंदी अर्थ  Read More »

    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और उनके हिंदी अर्थ      श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 , जिसे ज्ञान कर्म संन्यास योग कहा जाता है, कर्म योग और ज्ञान योग के संतुलन को दर्शाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 : कर्म योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 : कर्म योग श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 : कर्म योग श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में Read More »

श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय ३: कर्म योग यहाँ श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 के सभी ४३ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ अर्जुन उवाच: ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन। तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव॥ अर्जुन

निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से

निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से Read More »

  निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म करने की प्रेरणा दी, परंतु फल की इच्छा के बिना। इसे ही निष्काम कर्म कहा गया है।

Decode Dharma: learn Sanskrit and Hindi language for scriptures

Decode Dharma: learn Sanskrit and Hindi language for scriptures Read More »

Decode Dharma: संस्कृत और हिंदी की मूल बातें गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों की गहराई को समझें हमारे शुरुआती स्तर के कोर्स के साथ! भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47): कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। अर्थ: तुम्हारा अधिकार

श्रीमद् भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या

श्रीमद् भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या Read More »

    भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या GeetaNiti.in पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भगवद्गीता सनातन धर्म का सार है जिसे विभिन्न संतों, चिंतकों और योगियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से समझाया है। प्रस्तुत है 10 प्रमुख व्याख्याएं: 1. आदि शंकराचार्य

Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान Read More »

  जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप

गीता के अनुसार कर्म का महत्व

गीता के अनुसार कर्म का महत्व Read More »

WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और

Vibrant depiction of Lord Ganesha statue adorned with gold and bright colors for the Ganesh Chaturthi festival.

🪔 “जब जीवन उलझता है, तब गीता सुलझाती है”✍️Shubhhamm 🌿

🪔 “जब जीवन उलझता है, तब गीता सुलझाती है”✍️Shubhhamm 🌿 Read More »

हम सभी की ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं जब सब कुछ धुंधला लगने लगता है। न रिश्तों की समझ होती है, न काम की दिशा, न भावनाओं का उत्तर स्पष्ट होता है।हम भीतर ही भीतर एक असहज युद्ध लड़ते