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    Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

    ByShubham June 27, 2025July 28, 2025

      जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप समझाऊंगा, जिसे जानकर तुम अशुभ (भ्रम और बंधन) से मुक्त हो जाओगे। जीवन का महत्वपूर्ण…

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    गीता के अनुसार कर्म का महत्व

    ByShubham June 27, 2025July 28, 2025

    WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और न ही अकर्मण्यता में आसक्ति रखो। जीवन का महत्वपूर्ण प्रश्न: मेरे कर्मों का उद्देश्य क्या…

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    भगवद्गीता अध्याय 1 : अर्जुन विषाद योग

    ByShubham June 25, 2025July 28, 2025

      श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1अर्जुन विषाद योग कुल श्लोक: 47 | अर्थ सहित श्लोक 1 धृतराष्ट्र उवाच |धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥1॥ अर्थ: धृतराष्ट्र बोले – हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्रित हुए मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया? श्लोक 2 सञ्जय उवाच |दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं…

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  • Vibrant depiction of Lord Ganesha statue adorned with gold and bright colors for the Ganesh Chaturthi festival.
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    🪔 “जब जीवन उलझता है, तब गीता सुलझाती है”✍️Shubhhamm 🌿

    ByShubham June 12, 2025August 9, 2025

    हम सभी की ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं जब सब कुछ धुंधला लगने लगता है। न रिश्तों की समझ होती है, न काम की दिशा, न भावनाओं का उत्तर स्पष्ट होता है।हम भीतर ही भीतर एक असहज युद्ध लड़ते हैं — ठीक वैसे ही जैसे अर्जुन कुरुक्षेत्र में खड़ा था।सवाल अलग हो सकते हैं,…

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