शिव जी पर चढ़ाए गए प्रसाद को लेकर शंका समाधान

 

शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद और बेलपत्र

पारद शिवलिंग पर अभिषेक और नैवेद्य

शिव पूजा के दौरान एक प्रश्न अक्सर सामने आता है। क्या शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। कुछ ग्रंथ इसे पवित्र बताते हैं। कुछ मान्यताएं सावधानी की बात कहती हैं। इसलिए आपके मन में संशय होना स्वाभाविक है। यहां आपको स्पष्ट और शास्त्र आधारित जानकारी मिलती है।

शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद क्यों नहीं खाते

सामान्य रूप से भगवान को अर्पित प्रसाद रोग शोक नाशक और पुण्यदायक माना गया है। फिर भी कुछ परिस्थितियों में शिवलिंग पर चढ़ाया गया नैवेद्य ग्रहण नहीं किया जाता।

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव के एक गण चंडेश्वर को शिव पूजा में अर्पित कुछ अंश का अधिकार प्राप्त है। मान्यता कहती है कि पत्थर या मिट्टी के शिवलिंग पर चढ़ा भोग चंडेश्वर के अधिकार में माना जाता है। इसलिए उसे मनुष्यों द्वारा ग्रहण नहीं किया जाता।

शिव पुराण में क्या कहा गया है

शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता में स्पष्ट उल्लेख मिलता है:

चण्डाधिकारो यत्रास्ति तद्भोक्तव्यं न मानवै।
चण्डाधिकारो नो यत्र भोक्तव्यं तच्च भक्तित।

अर्थ यह है। जहां चंड का अधिकार है वहां मनुष्य प्रसाद ग्रहण न करें। जहां चंड का अधिकार नहीं है वहां भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण करें।

किस शिवलिंग का प्रसाद नहीं खाना चाहिए

  • मिट्टी से बने शिवलिंग
  • साधारण पत्थर के शिवलिंग
  • चीनी मिट्टी के शिवलिंग

इन पर चढ़ाया गया भोग परंपरागत मान्यता के अनुसार ग्रहण नहीं किया जाता।

किस शिवलिंग का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं

  • धातु से बने शिवलिंग
  • पारद शिवलिंग
  • बाणलिंग, जो नर्मदा नदी से प्राप्त होता है
  • शालिग्राम के साथ स्थापित शिवलिंग
  • भगवान शिव की साकार मूर्ति पर चढ़ाया गया प्रसाद

इन सभी पर चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहणीय माना गया है। इसे ग्रहण करने से दोष नहीं लगता।

स्वयंभू और ज्योतिर्लिंग का प्रसाद

स्वयं प्रकट शिवलिंग और बारह ज्योतिर्लिंग चंड के अधिकार से मुक्त माने गए हैं। इन पर अर्पित प्रसाद पवित्र और ग्रहणीय है। प्रमुख ज्योतिर्लिंग इस प्रकार हैं:

  • सोमनाथ
  • मल्लिकार्जुन
  • महाकाल
  • ओंकारेश्वर
  • केदारनाथ
  • भीमशंकर
  • काशी विश्वनाथ
  • त्र्यंबकेश्वर
  • वैद्यनाथ
  • नागेश्वर
  • रामेश्वर
  • घुश्मेश्वर

इन धामों में चढ़ाया गया प्रसाद भक्त श्रद्धा से ग्रहण करते हैं।

सिद्ध शिवलिंग और तांत्रिक परंपरा

जो शिवलिंग सिद्ध संतों द्वारा प्रतिष्ठित हैं या जिनकी साधना से सिद्धि प्राप्त हुई है, वहां का प्रसाद भी ग्रहणीय है। शिव तंत्र की दीक्षा प्राप्त साधक सभी शिवलिंगों का प्रसाद महाप्रसाद मानकर ग्रहण करते हैं।

यदि प्रसाद ग्रहण न करें तो क्या करें

प्रसाद को फेंकना अपमान माना जाता है। जिसे आप ग्रहण न करें उसे किसी अन्य को देना भी उचित नहीं। सही उपाय यह है:

  • प्रसाद को बहते जल में प्रवाहित करें
  • नदी, तालाब या स्वच्छ जल स्रोत का चयन करें
  • श्रद्धा भाव बनाए रखें

प्रसाद भगवान को अर्पित अन्न है। इसलिए उसके साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करें।

शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद और बेलपत्र

पारद शिवलिंग पर अभिषेक और नैवेद्य

आप क्या ध्यान रखें

  • पहले जानें शिवलिंग किस पदार्थ का है
  • मंदिर की परंपरा समझें
  • पंडित से पूछकर निर्णय लें
  • श्रद्धा के साथ नियम का पालन करें

स्पष्ट नियम यह है। हर शिवलिंग का प्रसाद एक समान नहीं माना जाता। शास्त्र और परंपरा दोनों को समझकर निर्णय लें। इससे आपका संशय दूर होगा और पूजा शुद्ध भाव से पूरी होगी।


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