
Shiv Manas Pooja उन भक्तों के लिए अत्यंत सरल और प्रभावशाली उपाय है जो किसी कारणवश मंदिर नहीं जा पाते। भगवान शिव भाव के भूखे हैं, सामग्री के नहीं। यदि आपके पास समय या साधन नहीं है, तो भी आप सच्चे मन से Shiv Manas Pooja Vidhi करके महादेव को प्रसन्न कर सकते हैं।
Shiv Manas Pooja मानसिक रूप से की जाने वाली पूजा है। इसमें भक्त अपने हृदय में भगवान शिव का ध्यान करता है और मन ही मन उन्हें स्नान, वस्त्र, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करता है।
यह पूजा आदि शंकराचार्य द्वारा रचित शिव मानस पूजा स्तोत्र पर आधारित है और विशेष रूप से महाशिवरात्रि, सावन सोमवार या किसी भी शिव भक्त के लिए उपयोगी है।
रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरं
नानारत्नविभूषितं मृगमदामोदाङ्कितं चन्दनम् ।
जातीचम्पकबिल्वपत्ररचितं पुष्पं च धूपं तथा
दीपं देव दयानिधे पशुपते हृत्कल्पितं गृह्यताम् ॥1॥
हे दयानिधि पशुपति भगवान शिव! मैं अपने हृदय में आपके लिए रत्नों का सिंहासन, हिम के समान शीतल जल से स्नान, दिव्य वस्त्र, मृगमद और चंदन से सुगंधित श्रृंगार अर्पित करता हूँ। जाति, चम्पा और बिल्वपत्र के पुष्प, धूप और दीप भी मानसिक रूप से अर्पित करता हूँ। कृपया मेरी इस भावपूर्ण मानस पूजा को स्वीकार करें।
सौवर्णे नवरत्नखण्डरचिते पात्रे घृतं पायसं
भक्ष्यं पञ्चविधं पयोदधियुतं रम्भाफलं पानकम् ।
शाकानामयुतं जलं रुचिकरं कर्पूरखण्डोज्ज्वलं
ताम्बूलं मनसा मया विरचितं भक्त्या प्रभो स्वीकुरु ॥2॥
हे प्रभु! स्वर्ण और नवरत्नों से बने पात्र में घी, खीर, पाँच प्रकार के व्यंजन, दूध-दही युक्त भोजन, केला, शाक और शुद्ध जल अर्पित करता हूँ। कर्पूर मिश्रित ताम्बूल भी मन से अर्पित करता हूँ। कृपया भक्तिभाव से की गई इस मानसिक भोग अर्पणा को स्वीकार करें।
छत्रं चामरयोर्युगं व्यजनकं चादर्शकं निर्मलं
वीणाभेरिमृदङ्गकाहलकला गीतं च नृत्यं तथा ।
साष्टाङ्गं प्रणतिः स्तुतिर्बहुविधा ह्येतत्समस्तं मया
सङ्कल्पेन समर्पितं तव विभो पूजां गृहाण प्रभो ॥3॥
हे प्रभु! मैं आपको छत्र, चंवर, पंखा और स्वच्छ दर्पण अर्पित करता हूँ। वीणा, मृदंग और वाद्यों के साथ गीत और नृत्य भी समर्पित करता हूँ। साष्टांग प्रणाम और विभिन्न प्रकार की स्तुतियाँ भी संकल्पपूर्वक अर्पित करता हूँ। कृपया मेरी इस संपूर्ण मानस पूजा को स्वीकार करें।
आत्मा त्वं गिरिजा मतिः सहचराः प्राणाः शरीरं गृहं
पूजा ते विषयोपभोगरचना निद्रा समाधिस्थितिः ।
सञ्चारः पदयोः प्रदक्षिणविधिः स्तोत्राणि सर्वा गिरो
यद्यत्कर्म करोमि तत्तदखिलं शम्भो तवाराधनम् ॥4॥
हे शम्भो! आप ही मेरी आत्मा हैं, पार्वती मेरी बुद्धि हैं, प्राण आपके सहचर हैं और यह शरीर आपका मंदिर है। जो भी मैं भोग करता हूँ, वह आपकी पूजा है। मेरी नींद आपकी समाधि है, चलना आपकी प्रदक्षिणा है, और मेरे द्वारा बोले गए सभी शब्द आपकी स्तुति हैं। मैं जो भी कर्म करता हूँ, वह सब आपकी आराधना है।
किं वा वानेन धनेन वाजिकरिभी प्राप्तेन राज्येन किम ।
किं वा पुत्रकलत्र पशुभिर देहेन गेहेन किम ।
ज्ञातवेत तत्क्षण भंगुरं सपदि रे त्याज्यं मनो दुरत: ।
स्वामार्थं गुरु वाक्यतो भज भज श्री पार्वती वल्लभम् ॥5॥
धन, राज्य, हाथी-घोड़े, पुत्र, पत्नी, शरीर या घर से क्या लाभ? ये सब क्षणभंगुर हैं और नश्वर हैं। हे मन! इनसे मोह त्यागकर गुरु के वचनों का पालन करो और पार्वती के प्रिय भगवान शिव का भजन करो।
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सुबह स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। यदि संभव हो तो सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
घर में एक शांत स्थान चुनें। यदि शिव की तस्वीर या शिवलिंग है तो उसके सामने बैठें, अन्यथा मन में शिव का ध्यान करें।
कम से कम 108 बार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
अंत में अपनी मनोकामना कहें और शिव से आशीर्वाद मांगें।
आप Shiv Manas Pooja किसी भी दिन कर सकते हैं, लेकिन सोमवार, महाशिवरात्रि और सावन मास में इसका विशेष महत्व है।
Maha Shivratri में यदि आप मंदिर नहीं जा सकते, तो भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सच्चे मन से की गई Shiv Manas Pooja भगवान शिव को उतनी ही प्रिय है जितनी विधिवत पूजा। महादेव केवल भाव देखते हैं।
हर हर महादेव!
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