🙏 सकट चौथ व्रत कथा 2026 (Sakat Chauth Vrat Katha)

सकट चौथ को तिल चौथ, गणेश चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।
यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, सुख और समृद्धि के लिए करती हैं।
मान्यता है कि सकट चौथ पर भगवान गणेश और सकट माता की पूजा तथा कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

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📅 सकट चौथ 2026 कब है?

  • सकट चौथ 2026 तिथि: 6 जनवरी 2026 (मंगलवार)
  • मास: माघ कृष्ण पक्ष चतुर्थी
  • अंगारकी संकष्टी चतुर्थी: मंगलवार होने के कारण विशेष पुण्य

🌙 आज चंद्र उदय कब होगा? (Moon Rise on 6 Jan 2026)

चंद्रोदय – 6 जनवरी 2026:
लगभग 08:45 PM से 09:15 PM के बीच (स्थान के अनुसार अंतर संभव)।

📌 नोट: सटीक समय के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।


📖 सकट चौथ की पहली कथा – सकट माता की कृपा

एक गांव में दो देवरानी-जेठानी रहती थीं। एक धनवान थी और दूसरी अत्यंत गरीब।
गरीब देवरानी सदा सेवा-भाव से रहती थी। सकट चौथ की रात वह केवल कनक के लड्डू और बथुआ से व्रत करती है।

रात्रि में सकट माता वेश बदलकर उसके घर आती हैं। देवरानी श्रद्धा से जो कुछ होता है, अर्पित कर देती है।
सकट माता उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर उसे असीम धन और सुख का वरदान देती हैं।

वहीं जेठानी जब दिखावे और लालच से वही करती है, तो उसे फल नहीं मिलता।
इस कथा से सीख मिलती है कि भक्ति में आडंबर नहीं, भाव होना चाहिए।

“पूरी कथा पढ़े”


📖 दूसरी कथा – कुम्हार और सकट माता

एक नगर में कुम्हार का आंवा कभी नहीं पकता था। बलि की कुप्रथा चल पड़ी।
एक वृद्धा का बेटा भी बलि के लिए चुना गया।

बुढ़िया ने सकट माता का व्रत रखकर अपने पुत्र को भगवान के भरोसे आंवे में बैठा दिया।
सकट माता की कृपा से आंवा भी पक गया और बच्चा भी सुरक्षित रहा

तब से सकट चौथ को संतान रक्षा का महाव्रत माना जाने लगा।

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📖 तीसरी कथा – तिल और गुड़ का चमत्कार

एक गरीब ब्राह्मण का बेटा राजा के यहां काम करता था।
माघ मास में चोरी न करने की भावना से वह असमंजस में पड़ गया।

राजा ने उसकी सच्चाई जानकर तिल-गुड़ सहित अपार धन दान किया।
इस प्रकार सकट माता ने ईमानदारी और धर्म का फल दिया।

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📖 चौथी कथा – तिल से बना राजकुमार

एक निःसंतान राजा के यहां सकट माता की कृपा से तिल और गुड़ से बना बालक
सजीव राजकुमार बन गया।
यह कथा बताती है कि सकट माता असंभव को भी संभव बना देती हैं।

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🪔 सकट चौथ व्रत का महत्व

  • संतान की लंबी उम्र
  • विघ्न-बाधा से मुक्ति
  • गणेश जी की विशेष कृपा
  • दरिद्रता और कष्ट का नाश

🙏 निष्कर्ष

सकट चौथ व्रत 2026 केवल उपवास नहीं, बल्कि श्रद्धा, धैर्य और मातृत्व की शक्ति का प्रतीक है।
जो भी श्रद्धा से सकट चौथ की कथा पढ़ता या सुनता है,
उसके जीवन से संकट दूर होते हैं।

॥ जय सकट माता ॥ जय गणेशाय नमः ॥

 

 

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