श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग – श्रीमद्भगवद्गीता सभी श्लोक हिंदी अर्थ

 

 

🌟 श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 🌟
क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग

कुल श्लोक: 34 | संस्कृत मूल + हिंदी + अंग्रेजी अर्थ सहित
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📚श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 श्लोक सूची

श्लोक विषय
1-8 क्षेत्र का स्वरूप
9-12 क्षेत्रज्ञ ज्ञान के लक्षण
13-18 परमात्मा का स्वरूप
19-34 प्रकृति-पुरुष विवेक

श्लोक 1

श्रीभगवानुवाच 

इदं शरीरं कौन्तेय क्षेत्रमित्यभिधीयते ।

एतद्यो वेत्ति तं प्राहुः क्षेत्रज्ञ इति तद्विदः ॥१३।१॥

हिंदी अर्थ:

श्री भगवान बोले- हे अर्जुन! यह शरीर ‘क्षेत्र’ कहा जाता है और जो इसे जानता है उसे ‘क्षेत्रज्ञ’ कहते हैं।

English Meaning:

The Lord said: This body is called ‘field’, O son of Kunti, and he who knows it is called ‘knower of the field’.

श्लोक 2

क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत ।

क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं यत्तज् ज्ञानं मतं मम ॥१३।२॥

हिंदी अर्थ:

हे भारत! सभी क्षेत्रों में क्षेत्रज्ञ भी मुझे ही जान। क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का ज्ञान ही परम ज्ञान है।

English Meaning:

Know Me also, O Bharat, as the Knower of the field in all fields. That knowledge which knows field and knower is My knowledge.

श्लोक 3

तत्क्षेत्रं यच्च यादृक्च यद्विकारि यतश्च यत् ।

स च यो यत्प्रभावश्च तत्समासेन मे शृणु ॥१३।३॥

हिंदी अर्थ:

क्षेत्र, उसके स्वरूप, विकार, कारण और क्षेत्रज्ञ के स्वरूप व प्रभाव- यह सब संक्षेप में मुझसे सुन।

English Meaning:

Hear from Me in brief of the field, what it is, its knowable nature, its modifications and cause, and also the Knower.

श्लोक 4

ऋषिभिर्बहुधा गीतं छन्दोभिर्विविधैः पृथक् ।

ब्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर् विनिश्चितैः ॥१३।४॥

हिंदी अर्थ:

ऋषियों ने इसे अनेक प्रकार से गाया, वेदों ने विविध छंदों में कहा, ब्रह्मसूत्र ने तर्कपूर्ण पदों से प्रतिपादित किया।

English Meaning:

It has been sung by sages in various ways, distinguished by various Vedic hymns, and by Brahma-sutras with logical deductions.

श्लोक 5

महाभूतान्यहंकारो बुद्धिरव्यक्तमेव च ।

इन्द्रियाणि दशैकं च पञ्च चेन्द्रियगोचराः ॥१३।५॥

हिंदी अर्थ:

पाँच महाभूत, अहंकार, बुद्धि, अव्यक्त (मूलप्रकृति), दस इन्द्रियाँ, मन और पाँच विषय।

English Meaning:

Five great elements, egoism, intelligence, unmanifested Nature, ten senses and one mind, and five objects of senses.

श्लोक 6

इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं संघातश्चेतना धृतिः ।

एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम् ॥१३।६॥

हिंदी अर्थ:

इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, देह का पिण्ड, चेतना, धृति- यही विकार सहित क्षेत्र है।

English Meaning:

Desire, hatred, happiness, sorrow, the aggregate (body), consciousness and determination- thus field with modifications declared.

श्लोक 7

अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम् ।

आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः ॥१३।७॥

हिंदी अर्थ:

अमानित्व, अदम्भित्व, अहिंसा, क्षमा, सरलता, गुरु सेवा, शौच, धैर्य, आत्मसंयम।

English Meaning:

Humility, pridelessness, non-violence, forgiveness, straightforwardness, service to guru, purity, steadfastness, self-control.

श्लोक 8-9

इन्द्रियार्थेषु वैराग्यमनहंकार एव च ।

जन्ममृत्युजराव्याधिदुःखदोषानुदर्शनम् ॥१३।८॥

असक्तिरनभिष्वङ्गः पुत्रदारगृहादिषु ।

नित्यं समचित्तत्वं मिष्टानिष्टोपपत्तिषु ॥१३।९॥

हिंदी अर्थ:

विषयों में वैराग्य, अहंकाररहित, जन्म-मृत्यु आदि दुःखों का चिंतन, पुत्र-धन में आसक्ति न होना, सुख-दुःख में समभाव।

English Meaning:

Detachment from sense objects, absence of egoism, contemplation on pains of birth-death etc., non-attachment to son-wife-home, equanimity in pleasure-pain.

श्लोक 10

मयि चानन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी ।

विविक्तदेशसेवित्वमरतिर्जनसंसदि ॥१३।१०॥

हिंदी अर्थ:

मुझमें अनन्य भक्ति, एकांत निवास, जनसमूह से विरक्ति।

English Meaning:

Unswerving devotion to Me through single-minded yoga, inclination to live in solitary places, dislike for company.

श्लोक 11

अध्यात्मज्ञाननित्यत्वत्तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् ।

एतज्ज्ञानमिति प्रोक्तमज्ञानं यदतोऽन्यथा ॥१३।११॥

हिंदी अर्थ:

अध्यात्म ज्ञान में निष्ठा, तत्व को ही अर्थ मानना- यही ज्ञान है, अन्य सब अज्ञान।

English Meaning:

Constancy in Self-knowledge, seeing the purpose of Self-knowledge- this is knowledge, opposite is ignorance.

श्लोक 12

ज्ञेयं यत्तत्प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वाऽमृतमश्नुते ।

अनादिमत्परं ब्रह्म न सत्तन्नासदुच्यते ॥१३।१२॥

हिंदी अर्थ:

जिसे जानकर अमृत प्राप्ति होती है, वह अनादी परम ब्रह्म न सत् न असत्- वह बताऊंगा।

English Meaning:

I shall speak of that which is to be known, knowing which one attains immortality. That Supreme Brahman neither is nor is not.

श्लोक 13

सर्वतः पाणिपादं तत्सर्वतोऽक्षिशिरोमुखम् ।

सर्वतः श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ॥१३।१३॥

हिंदी अर्थ:

वह सर्वत्र हस्त-पद, नेत्र-शिरः-मुख, श्रोत्रयुक्त है- सबको व्याप्त करके स्थित है।

English Meaning:

Hands and feet everywhere, eyes-head-mouth everywhere, ears everywhere- enveloping all, It stands.

श्लोक 14

सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम् ।

असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च ॥१३।१४॥

हिंदी अर्थ:

इन्द्रिय गुणों को जानने वाला पर इन्द्रियों से रहित, असक्त, सर्वभृत, निर्गुण, गुणभोक्ता।

English Meaning:

All senses’ qualities yet without senses, unattached yet supporter, qualityless yet experiencer of qualities.

श्लोक 15

बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च ।

सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् ॥१३।१५॥

हिंदी अर्थ:

भूतों के बाहर-अंदर, चर-अचर, सूक्ष्म होने से अज्ञेय, दूर और समीप में स्थित।

English Meaning:

Outside and inside beings, moving and unmoving, due to subtlety unknowable, far yet near.

श्लोक 16

अविभक्तं विभक्तेषु भूतेषु विभक्तमिव च ।

भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च ॥१३।१६॥

हिंदी अर्थ:

अविभक्त पर भूतों में विभक्त-सा, भृत, ग्रासक, सृष्टिकर्ता।

English Meaning:

Undivided yet appears divided in beings, supporter, destroyer, creator.

श्लोक 17

ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते ।

ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् ॥१३।१७॥

हिंदी अर्थ:

ज्योतियों का ज्योति, तमः से परे, ज्ञान, ज्ञेय, ज्ञानगम्य, सर्व हृदय में स्थित।

English Meaning:

Light of lights, beyond darkness, knowledge, knowable, known by knowledge, seated in hearts of all.

श्लोक 18

इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासतः ।

मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते ॥१३।१८॥

हिंदी अर्थ:

क्षेत्र, ज्ञान, ज्ञेय का संक्षेप वर्णन। मेरा भक्त इसे जानकर मेरा स्वरूप प्राप्त करता है।

English Meaning:

Thus field, knowledge and knowable briefly described. My devotee knowing this attains My nature.

श्लोक 19

प्रकृतिं पुरुषं चैव विद्ध्यनादी उभावपि ।

विकारांश्च गुणांश्चैव विद्धि प्रकृतिसंभवान् ॥१३।१९॥

हिंदी अर्थ:

प्रकृति-पुरुष दोनों अनादी। विकार और गुण प्रकृति से उत्पन्न।

English Meaning:

Know both Nature and Soul beginningless. Know all modifications and qualities as born of Nature.

श्लोक 20

कार्यकरणकर्तृत्वे हेतुः प्रकृतिरुच्यते ।

पुरुषः सुखदुःखानां भोक्तृत्वे हेतुरुच्यते ॥१३।२०॥

हिंदी अर्थ:

कार्य-करण उत्पत्ति का कारण प्रकृति। सुख-दुःख भोग का कारण पुरुष।

English Meaning:

Nature is said to be cause of production of effects and instruments. Soul is cause of experiencing pleasures and pains.

श्लोक 21

पुरुषः प्रकृतिस्थो हि भुङ्क्ते प्रकृतिजान्गुणान् ।

कारणं गुणसङ्गोऽस्य सदसद्योनिजन्मसु ॥१३।२१॥

हिंदी अर्थ:

प्रकृति में स्थित पुरुष प्रकृति के गुण भोगता है। गुणसंग ही अच्छी-बुरी योनियों का कारण।

English Meaning:

Soul seated in Nature experiences Nature’s qualities. Attachment to qualities causes birth in good and evil wombs.

श्लोक 22

उपद्रष्टानुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वरः ।

परमात्मेति चाप्युक्तो देहेऽस्मिन्पुरुषः परः ॥१३।२२॥

हिंदी अर्थ:

देहे स्थित यह पर पुरुष उपद्रष्टा, अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर, परमात्मा है।

English Meaning:

In this body, that Supreme Soul is called spectator, permitter, supporter, enjoyer, great Lord, Supreme Self.

श्लोक 23

य एवं वेत्ति पुरुषं प्रकृतिं च गुणैः सह ।

सर्वथा वर्तमानोऽपि न स भूयोऽभिजायते ॥१३।२३॥

हिंदी अर्थ:

जो पुरुष और गुण सहित प्रकृति को तत्त्व से जानता है, वह कर्तव्य कर्म करता हुआ भी पुनर्जन्म नही लेता।

English Meaning:

He who knows thus Soul and Nature with qualities, though acting, is not born again.

श्लोक 24

ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना ।

अन्ये सांख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥१३।२४॥

हिंदी अर्थ:

कुछ ध्यान से, अन्य सांख्ययोग से, कुछ कर्मयोग से आत्मा को देखते हैं।

English Meaning:

Some perceive Self in Self through meditation, others through Sankhya yoga, others through Karma yoga.

श्लोक 25

अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्योऽपासते ।

तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः ॥१३।२५॥

हिंदी अर्थ:

अन्य श्रवण से जानकर उपासना करते हैं। श्रोतागण भी मृत्यु को तर जाते हैं।

English Meaning:

Others not knowing thus, hearing from others, follow. They too cross death by devotion to hearing.

श्लोक 26

यावत्संजायते किंचित् सत्त्वं स्थावरजङ्गमम् ।

क्षेत्रक्षेत्रज्ञसंयोगात्तद्विद्धि भरतर्षभ ॥१३।२६॥

हिंदी अर्थ:

सभी चराचर प्राणी क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ संयोग से उत्पन्न होते हैं।

English Meaning:

Whatever being is born, moving or unmoving, know it as due to union of field and knower, O best of Bharatas.

श्लोक 27

समं सर्वेषु भूतेषु तिष्ठन्तं परमेश्वरम् ।

विनश्यत्स्वविनश्यन्तं यः पश्यति स पश्यति ॥१३।२७॥

हिंदी अर्थ:

नष्ट होते भूतों में अविनाशी परमेश्वर को समान देखने वाला ही देखता है।

English Meaning:

He who sees Supreme Lord equally present in all beings, undecaying amidst the decaying, he sees truly.

श्लोक 28

समं पश्यन्न् हि सर्वत्र समवस्थितमीश्वरम् ।

न हिनस्त्यात्मनात्मानं ततो याति परां गतिम् ॥१३।२८॥

हिंदी अर्थ:

सर्वत्र सम स्थित ईश्वर को समान देखने से आत्मा को नष्ट नही करता, परम गति प्राप्त करता है।

English Meaning:

Seeing Lord equally everywhere, he does not destroy his Self, attains Supreme goal.

श्लोक 29

प्रकृत्यैव च कर्माणि क्रियमाणानि सर्वशः ।

यः पश्यति तथात्मानमकर्तारं स पश्यति ॥१३।२९॥

हिंदी अर्थ:

प्रकृति से कर्म होते देखना और आत्मा को अकर्ता देखना ही यथार्थ दृष्टि है।

English Meaning:

Seeing all actions done by Nature alone and Self as non-doer, he sees truly.

श्लोक 30

यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति ।

तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा ॥१३।३०॥

हिंदी अर्थ:

भूतों की विविधता को एक में और एक से विविधता देखने पर ब्रह्म प्राप्ति होती है।

English Meaning:

When he sees diverse beings as one and their expansion from One, then he attains Brahman.

श्लोक 31

अनादित्वान् निर्गुणत्वात् परमात्मायमव्ययः ।

शरीरस्थोऽपि कौन्तेय न करोति न लिप्यते ॥१३।३१॥

हिंदी अर्थ:

हे कुन्तीपुत्र! अनादी निर्गुण अविनाशी परमात्मा शरीर में भी न करता है न लिप्त होता है।

English Meaning:

Beginningless, qualityless, this imperishable Supreme Self in body neither acts nor is tainted, O son of Kunti.

श्लोक 32

यथा सर्वगतं सूक्ष्म्यादाकाशं नोपलिप्यते ।

सर्वत्रावस्थितो देहे तथात्मा नोपलिप्यते ॥१३।३२॥

हिंदी अर्थ:

जैसे सूक्ष्म आकाश लिप्त नही होता, वैसे देह में स्थित आत्मा लिप्त नही होता।

English Meaning:

As all-pervading space due to subtlety is not tainted, so the Self seated in body is not tainted.

श्लोक 33

यथा प्रकाशयत्येकः कृत्स्नं लोकमिमं रविः ।

क्षेत्रं क्षेत्री तथा कृत्स्नं प्रकाशयति भारत ॥१३।३३॥

हिंदी अर्थ:

जैसे एक सूर्य संसार को प्रकाशित करता है, वैसे क्षेत्रज्ञ सम्पूर्ण क्षेत्र को प्रकाशित करता है।

English Meaning:

As one sun illuminates whole world, so does Knower illuminate entire field, O Bharat.

श्लोक 34

क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोरेवमन्तरं ज्ञानचक्षुषा ।

भूतप्रकृतिमोक्षं च ये विदुर् यान्ति ते परम् ॥१३।३४॥

हिंदी अर्थ:

ज्ञानचक्षु से क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ भेद और प्रकृतिमोक्ष को जो जानते हैं, वे परम प्राप्त करते हैं।

English Meaning:

Those who see distinction between field-knower with eye of knowledge and emancipation from material nature attain Supreme.


 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्षेत्र क्या है भगवद्गीता में?

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13 में क्षेत्र का अर्थ है यह शरीर जो कर्मभोग का स्थान है। इसमें पंच महाभूत, इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, इच्छा-द्वेष आदि शामिल हैं।

क्षेत्रज्ञ कौन है?

क्षेत्रज्ञ आत्मा या पुरुष है जो शरीर का साक्षी है। वह उपद्रष्टा, अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता और महेश्वर है।

अध्याय 13 का मुख्य संदेश क्या है?

यह अध्याय शरीर (क्षेत्र) और आत्मा (क्षेत्रज्ञ) के विभाग को समझाता है तथा प्रकृति-पुरुष विवेक से मोक्ष का मार्ग दिखाता है।

ज्ञान के 6 मुख्य लक्षण कौन से हैं?

1. अमानित्व (अभिमानरहित), 2. अदम्भित्व (पाखंडरहित), 3. अहिंसा, 4. क्षांति, 5. आर्जव (सरलता), 6. गुरु सेवा।

परमात्मा के गुण श्लोक 13-18 में कौन से हैं?

सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, निर्गुण, गुणभोक्ता, सूक्ष्म, अविभक्त, भूतभर्ता, ज्योतिस्वरूप आदि।

अध्याय 13 कब पढ़ना चाहिए?

ज्ञान प्राप्ति, आत्म-साक्षात्कार और प्रकृति से मुक्ति के लिए। विशेषकर विवेक बुद्धि जागरण हेतु।

॥ अध्याय 13 समाप्त ॥
क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग

अगला अध्याय: अध्याय 14 – गुणत्रयविभाग योग




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