गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता
गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता GeetaNiti.in – भगवद् गीता की शिक्षाओं का मंच श्लोक ३.५ न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः।। हिंदी अनुवाद कोई भी मनुष्य एक क्षण भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता। प्रकृति के गुणों द्वारा सभी प्राणियों से कर्म करवाया जाता है। श्लोक की व्याख्या…
