श्रीमद् भगवद्गीता अध्याय 8 : अक्षर ब्रह्म योग

श्रीमद् भगवद्गीता अध्याय 8 : अक्षर ब्रह्म योग

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    श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय ८ अक्षरब्रह्मयोग भगवद्गीता का आठवाँ अध्याय ‘अक्षरब्रह्मयोग’ के नाम से जाना जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को परब्रह्म, आत्मा, समाधि और भगवान के धाम की महिमा के बारे में बताते हैं। इस […]

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7 – सभी श्लोक हिंदी अर्थ सहित | गीता नीति

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    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग सभी श्लोक हिन्दी अर्थ सहित श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय, ज्ञान विज्ञान योग में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी प्रकृति, माया, और भक्तों के प्रकारों का वर्णन किया है। इस अध्याय में भगवान ने

श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6 ध्यान yoga

श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6: आत्मसंयम योग सभी 47 श्लोक और हिंदी अर्थ

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  श्रीमद भगवद गीता अध्याय 6 ध्यान योग – सभी 47 श्लोक और हिंदी अर्थ श्रीमद भगवद गीता का छठा अध्याय, जिसे आत्मसंयम योग या ध्यान योग के नाम से जाना जाता है, ध्यान और आत्म-नियंत्रण के महत्व को दर्शाता

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 कर्म संन्यास योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5: कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और हिंदी अर्थ

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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 कर्म संन्यास योग – सभी श्लोक और हिंदी अर्थ श्रीमद्भगवद्गीता हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जो जीवन के गहरे दर्शन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसका पांचवां अध्याय – कर्म संन्यास योग कर्म और

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और उनके हिंदी अर्थ 

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    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और उनके हिंदी अर्थ      श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 , जिसे ज्ञान कर्म संन्यास योग कहा जाता है, कर्म योग और ज्ञान योग के संतुलन को दर्शाता है।

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 : कर्म योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 : कर्म योग श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में

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श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय ३: कर्म योग यहाँ श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 के सभी ४३ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ अर्जुन उवाच: ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन। तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव॥ अर्जुन

श्रीमद् भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या

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    भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या GeetaNiti.in पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भगवद्गीता सनातन धर्म का सार है जिसे विभिन्न संतों, चिंतकों और योगियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से समझाया है। प्रस्तुत है 10 प्रमुख व्याख्याएं: 1. आदि शंकराचार्य

Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

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  जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप

गीता के अनुसार कर्म का महत्व

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WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और