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  • श्री गोविंद दामोदर स्तोत्रम्-श्री बिल्व मंगल द्वारा रचित
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    श्री गोविंद दामोदर स्तोत्रम्-श्री बिल्व मंगल द्वारा रचित

    ByShubham August 21, 2025August 23, 2025

    श्री गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् — अर्थ सहित रचयिता: परम्परा में श्री बिल्वमंगल ठाकुर (लीलाशुक) से संबद्ध | पाठ: देवनागरी | सरल हिंदी अर्थ कैसे पढ़ें? हर पद के अंत में आने वाला रिफ्रेन “गोविन्द दामोदर माधवेति।” जिह्वा-स्मरण का निरंतर आग्रह है। “गोविन्द दामोदर स्तोत्र” भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक अत्यंत सुंदर स्तोत्र है, जिसे भक्तगण…

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    आधुनिक जीवन में गीता | नीति वचन एवं जीवन उपदेश | भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ

    गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता

    ByShubham August 4, 2025August 24, 2025

      गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता GeetaNiti.in – भगवद् गीता की शिक्षाओं का मंच श्लोक ३.५ न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः।। हिंदी अनुवाद कोई भी मनुष्य एक क्षण भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता। प्रकृति के गुणों द्वारा सभी प्राणियों से कर्म करवाया जाता है। श्लोक की व्याख्या…

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  • गीता सार/ अष्टादस अध्याय | भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ

    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5: कर्म संन्यास योग

    ByShubham August 4, 2025February 2, 2026

    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5: कर्म संन्यास योग – सभी श्लोक और हिंदी अर्थ श्रीमद्भगवद्गीता हिंदू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है, जो जीवन के गहरे दर्शन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसका पांचवां अध्याय – कर्म संन्यास योग कर्म और संन्यास के बीच संतुलन की शिक्षा देता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को…

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  • गीता सार/ अष्टादस अध्याय | ब्लॉग / लेख संग्रह | भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ

    गीता का चौथा अध्याय – ज्ञान कर्म संन्यास योग

    ByShubham August 4, 2025September 6, 2025

      गीता का चौथा अध्याय – ज्ञान कर्म संन्यास योग श्रीमद्भगवद्गीता का चौथा अध्याय, जिसे ज्ञान कर्म संन्यास योग कहा जाता है, कर्म योग और ज्ञान योग के संतुलन को दर्शाता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म के महत्व, ज्ञान की शक्ति और संन्यास के सही स्वरूप को समझाते हैं। नीचे इस अध्याय के…

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  • Homepage: GeetanNiti | भगवद्गीता मुख्य श्लोक एवं अर्थ

    FEATURED DAILY SHLOKA

    ByShubham July 24, 2025

    GeetaNiti.in भगवद गीता से प्रेरणा लें, हर दिन एक नई शुरुआत करें 🌸 Featured Shloka – श्लोक 2.47 🌸 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। इसलिए कर्म को फल की इच्छा से मत करो और न ही अकर्म में आसक्त हो।…

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    Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

    ByShubham June 27, 2025July 28, 2025

      जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप समझाऊंगा, जिसे जानकर तुम अशुभ (भ्रम और बंधन) से मुक्त हो जाओगे। जीवन का महत्वपूर्ण…

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    गीता के अनुसार कर्म का महत्व

    ByShubham June 27, 2025July 28, 2025

    WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और न ही अकर्मण्यता में आसक्ति रखो। जीवन का महत्वपूर्ण प्रश्न: मेरे कर्मों का उद्देश्य क्या…

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    भगवद्गीता द्वितीय अध्याय:सांख्य योग

    ByShubham June 25, 2025July 29, 2025

      श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय २: सांख्य योग यहाँ भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय के सभी ७२ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ संजय उवाच:दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्॥ संजय ने कहा: उस समय पाण्डवों की सेना को व्यूहरचित देखकर राजा दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य के पास…

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    भगवद्गीता अध्याय 1 : अर्जुन विषाद योग

    ByShubham June 25, 2025July 28, 2025

      श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1अर्जुन विषाद योग कुल श्लोक: 47 | अर्थ सहित श्लोक 1 धृतराष्ट्र उवाच |धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥1॥ अर्थ: धृतराष्ट्र बोले – हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्रित हुए मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया? श्लोक 2 सञ्जय उवाच |दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं…

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