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भगवद्गीता अध्याय 15 | पुरुषोत्तम योग | श्लोक एवं हिंदी अर्थ सहित

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    श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 15 पुरुषोत्तम योग भगवद्गीता अध्याय 15 में भगवान श्रीकृष्ण संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष का वर्णन करते हैं।  यह अध्याय जीवात्मा, परमात्मा और पुरुषोत्तम तत्व का गूढ़ रहस्य स्पष्ट करता है। यह छोटा लेकिन अत्यंत गहन […]

श्री गोविंद दामोदर स्तोत्रम्-श्री बिल्व मंगल द्वारा रचित

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श्री गोविन्द दामोदर स्तोत्रम् — अर्थ सहित रचयिता: परम्परा में श्री बिल्वमंगल ठाकुर (लीलाशुक) से संबद्ध | पाठ: देवनागरी | सरल हिंदी अर्थ कैसे पढ़ें? हर पद के अंत में आने वाला रिफ्रेन “गोविन्द दामोदर माधवेति।” जिह्वा-स्मरण का निरंतर आग्रह

SRIMAD BHAGWAT GEETA NITI

गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता

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  गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता GeetaNiti.in – भगवद् गीता की शिक्षाओं का मंच श्लोक ३.५ न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः।। हिंदी अनुवाद कोई भी मनुष्य एक क्षण भी कर्म किए बिना नहीं रह

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और उनके हिंदी अर्थ 

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    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 – ज्ञान कर्म संन्यास योग सभी श्लोक और उनके हिंदी अर्थ      श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4 , जिसे ज्ञान कर्म संन्यास योग कहा जाता है, कर्म योग और ज्ञान योग के संतुलन को दर्शाता है।

FEATURED DAILY SHLOKA

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GeetaNiti.in भगवद गीता से प्रेरणा लें, हर दिन एक नई शुरुआत करें 🌸 Featured Shloka – श्लोक 2.47 🌸 कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ हिंदी अर्थ: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। इसलिए

Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

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  जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप

गीता के अनुसार कर्म का महत्व

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WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 : सांख्य योग

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 : सांख्य योग श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में

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    श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 2 : सांख्य योग यहाँ भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय के सभी ७२ श्लोक संस्कृत में और उनके अर्थ हिंदी में प्रस्तुत किए गए हैं। श्लोक १ संजय उवाच:दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा।आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्॥ संजय ने

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 अर्जुन विषाद योग

भगवद्गीता अध्याय 1 : अर्जुन विषाद योग

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श्रीमद्भगवद्गीता – अध्याय 1अर्जुन विषाद योग कुल श्लोक: 47 | संस्कृत मूल + हिंदी + अंग्रेजी अर्थ सहित 📖 श्लोक सूची श्लोक संख्या वक्ता मुख्य विषय 1-11 धृतराष्ट्र/दुर्योधन सेनाओं का वर्णन 12-19 भीष्म/पांडव शंखनाद 20-47 अर्जुन/संजय अर्जुन का विषाद श्लोक