राम मंदिर अयोध्या, Ram Mandir Ayodhya, राम मंदिर का उद्घाटन कब हुआ, अयोध्या राम मंदिर किस राज्य में, where is ayodhya ram mandir, राम मंदिर कब बना, when was ram mandir inaugurated, अयोध्या राम मंदिर कहाँ है, राम मंदिर दर्शन समय, ram mandir pran pratishtha

राम मंदिर अयोध्या | Ram Mandir Ayodhya Complete History Architecture Timings

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  🛕 राम मंदिर अयोध्या Ram Mandir Ayodhya – Complete History, Architecture & Visiting Guide गीतानिति.इन होमपेज | 2026 Calendar 📜 राम मंदिर अयोध्या का 500 वर्षीय इतिहास राम मंदिर अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि पर बना विश्व का सबसे […]

SRIMAD BHAGWAT GEETA NITI

गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता

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  गीता का उपदेश: कर्म की अनिवार्यता GeetaNiti.in – भगवद् गीता की शिक्षाओं का मंच श्लोक ३.५ न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः।। हिंदी अनुवाद कोई भी मनुष्य एक क्षण भी कर्म किए बिना नहीं रह

निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से

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  निष्काम कर्म का सिद्धांत – भगवद गीता और अन्य ग्रंथों की दृष्टि से भगवद गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म करने की प्रेरणा दी, परंतु फल की इच्छा के बिना। इसे ही निष्काम कर्म कहा गया है।

Decode Dharma: learn Sanskrit and Hindi language for scriptures

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Decode Dharma: संस्कृत और हिंदी की मूल बातें गीता, उपनिषद और अन्य शास्त्रों की गहराई को समझें हमारे शुरुआती स्तर के कोर्स के साथ! भगवद्गीता (अध्याय 2, श्लोक 47): कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। अर्थ: तुम्हारा अधिकार

श्रीमद् भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या

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    भगवद्गीता पर 10 महान व्यक्तियों की व्याख्या GeetaNiti.in पर आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भगवद्गीता सनातन धर्म का सार है जिसे विभिन्न संतों, चिंतकों और योगियों ने अपने-अपने दृष्टिकोण से समझाया है। प्रस्तुत है 10 प्रमुख व्याख्याएं: 1. आदि शंकराचार्य

Geetaniti: Solution to the confusion through Bhagwat Geeta गीतानीति: भगवद्गीता के माध्यम से भ्रम का समाधान

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  जीवन में भ्रम का समाधान: भगवद्गीता की प्रेरणा किं कर्म किमकर्मेति कवयोऽप्यत्र मोहिताः।तत्ते कर्म प्रवक्ष्यामि यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्॥ अर्थ: कर्म क्या है और अकर्म क्या है, इस विषय में विद्वान भी भ्रमित हो जाते हैं। मैं तुम्हें कर्म का स्वरूप

गीता के अनुसार कर्म का महत्व

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WhatsApp Channel  जीवन का उद्देश्य: भगवद्गीता की शिक्षाओं से प्रेरणा कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तुम्हें केवल अपने कर्म करने का अधिकार है, उनके फलों पर नहीं। न तो तुम कर्म के फल के कारण बनो, और

Vibrant depiction of Lord Ganesha statue adorned with gold and bright colors for the Ganesh Chaturthi festival.

🪔 “जब जीवन उलझता है, तब गीता सुलझाती है”✍️Shubhhamm 🌿

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हम सभी की ज़िंदगी में ऐसे पल आते हैं जब सब कुछ धुंधला लगने लगता है। न रिश्तों की समझ होती है, न काम की दिशा, न भावनाओं का उत्तर स्पष्ट होता है।हम भीतर ही भीतर एक असहज युद्ध लड़ते