केरल का नाम बदलकर ‘केरलम्’ करने का प्रस्ताव – इतिहास, कारण, संवैधानिक प्रक्रिया और वर्तमान स्थिति

हाल के समय में केरल राज्य के नाम को आधिकारिक रूप से “केरल” से बदलकर “केरलम्” करने का प्रस्ताव चर्चा का विषय बना हुआ है। यह परिवर्तन केवल एक अक्षर जोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि यह भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा विषय है।
मलयालम भाषा में राज्य का नाम “केरलम्” ही प्रचलित है, जबकि अंग्रेज़ी और सरकारी दस्तावेज़ों में इसे “Kerala” लिखा जाता है। राज्य सरकार ने इस अंतर को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
केरल राज्य का ऐतिहासिक गठन
1 नवम्बर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के बाद केरल राज्य अस्तित्व में आया। इसमें त्रावणकोर, कोचीन और मलाबार क्षेत्र को मिलाकर नया राज्य बनाया गया।
राज्य का नाम “केरल” आधिकारिक रूप से अपनाया गया, लेकिन स्थानीय भाषा में सदैव “केरलम्” शब्द का प्रयोग होता रहा।
इस प्रकार “केरलम्” शब्द सांस्कृतिक और भाषाई दृष्टि से अधिक प्रामाणिक माना जाता है।
नाम परिवर्तन की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
1. भाषाई शुद्धता
मलयालम में राज्य का उच्चारण “केरलम्” है। समर्थकों का कहना है कि अंग्रेज़ी नाम भी उसी के अनुरूप होना चाहिए।
2. सांस्कृतिक पहचान
नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि इतिहास और परंपरा का प्रतीक भी होता है। “केरलम्” शब्द राज्य की मूल सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है।
3. अन्य राज्यों के उदाहरण
भारत में पहले भी कई राज्यों और शहरों के नाम बदले गए हैं — जैसे मद्रास से चेन्नई, कलकत्ता से कोलकाता, उड़ीसा से ओडिशा।
संविधान के अनुसार नाम परिवर्तन की प्रक्रिया
भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के नाम में परिवर्तन करने की प्रक्रिया निर्धारित है।
- राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पारित
- केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजना
- संसद में विधेयक प्रस्तुत करना
- दोनों सदनों से पारित होना
- राष्ट्रपति की स्वीकृति
इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद ही नाम आधिकारिक रूप से बदला जा सकता है।
राजनीतिक स्थिति
केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पारित किया। इस मुद्दे पर अधिकांश राजनीतिक दलों ने समर्थन व्यक्त किया।
इसे सांस्कृतिक सुधार के रूप में प्रस्तुत किया गया, न कि राजनीतिक लाभ के लिए।
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सामाजिक प्रतिक्रिया
जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित रही।
- कुछ लोग इसे गर्व का विषय मानते हैं
- कुछ का मानना है कि यह प्रतीकात्मक कदम है
- कुछ लोग प्रशासनिक खर्च को लेकर चिंतित हैं
हालाँकि, आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव सीमित रहेगा।
क्या इससे प्रशासनिक बदलाव होंगे?
यदि नाम परिवर्तन को संसद से स्वीकृति मिलती है, तो निम्नलिखित बदलाव संभव हैं:
- सरकारी दस्तावेज़ों में संशोधन
- राज्य की वेबसाइटों में अद्यतन
- मानचित्रों में परिवर्तन
- केंद्रीय अभिलेखों में संशोधन
ये परिवर्तन धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से किए जाते हैं।

आर्थिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका आर्थिक ढांचे पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह परिवर्तन मुख्यतः सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक है।
आगे की प्रक्रिया क्या है?
केंद्र सरकार द्वारा विधेयक तैयार किया जाएगा और संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। संसद की मंजूरी के बाद ही अंतिम अधिसूचना जारी होगी।
जब तक यह प्रक्रिया पूर्ण नहीं होती, “केरल” ही आधिकारिक नाम बना रहेगा।
निष्कर्ष
केरल से केरलम् नाम परिवर्तन का प्रस्ताव भाषा और पहचान से जुड़ा हुआ विषय है। यह प्रशासनिक बदलाव से अधिक सांस्कृतिक मान्यता का प्रश्न है।
अंतिम निर्णय संसद की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. क्या केरल का नाम आधिकारिक रूप से बदल गया है?
नहीं, अभी संसद की स्वीकृति शेष है।
2. “केरलम्” शब्द का अर्थ क्या है?
यह मलयालम में राज्य का पारंपरिक नाम है।
3. क्या इससे राज्य की सीमाएँ बदलेंगी?
नहीं, केवल नाम परिवर्तन प्रस्तावित है।
4. नाम बदलने का निर्णय कौन लेता है?
संसद, अनुच्छेद 3 के तहत।
5. क्या इससे सरकारी दस्तावेज़ बदलेंगे?
हाँ, स्वीकृति मिलने पर चरणबद्ध बदलाव होंगे।
6. क्या अन्य राज्यों के नाम बदले गए हैं?
हाँ, कई राज्यों और शहरों के नाम बदले गए हैं।
7. क्या इससे नागरिकों के दस्तावेज़ प्रभावित होंगे?
तुरंत नहीं, बदलाव क्रमिक होगा।
8. अंतिम निर्णय कब आएगा?
संसद में विधेयक पारित होने के बाद।
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