चातुर्मास 2026 – तिथि, एकादशी सूची, व्रत नियम और आध्यात्मिक महत्व

सनातन धर्म में चातुर्मास को चार महीनों का अत्यंत पवित्र काल माना जाता है। यह समय साधना, व्रत, जप, तप, दान और आत्मचिंतन के लिए विशेष महत्व रखता है।
यदि आप चातुर्मास 2026 कब से शुरू होगा और कब समाप्त होगा, यह जानना चाहते हैं, तो यहां आपको संपूर्ण जानकारी सरल भाषा में प्राप्त होगी।
चातुर्मास 2026 प्रारंभ और समाप्ति तिथि
चातुर्मास 2026 प्रारंभ: 15 जुलाई 2026 (बुधवार) – देवशयनी एकादशी
चातुर्मास 2026 समाप्त: 12 नवंबर 2026 (गुरुवार) – देवउठनी एकादशी
यह काल आषाढ़ शुक्ल एकादशी से आरंभ होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं और देवउठनी एकादशी को जागृत होते हैं।
चातुर्मास 2026 के दौरान प्रमुख एकादशी तिथियाँ
- देवशयनी एकादशी – 15 जुलाई 2026
- पुत्रदा एकादशी – 14 अगस्त 2026
- परिवर्तिनी एकादशी – 27 सितंबर 2026
- पापांकुशा एकादशी – 26 अक्टूबर 2026
- देवउठनी एकादशी – 12 नवंबर 2026
चातुर्मास में आने वाली एकादशी तिथियों का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस अवधि में व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
चातुर्मास 2026 के दौरान प्रमुख पर्व
चातुर्मास केवल व्रत का समय ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण त्योहारों का भी काल है:
- गुरु पूर्णिमा
- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
- गणेश चतुर्थी
- शारदीय नवरात्रि
इन पर्वों के कारण यह चार माह आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध माने जाते हैं।
चातुर्मास का आध्यात्मिक महत्व
‘चातुर्मास’ शब्द का अर्थ है – चार महीने। यह समय वर्षा ऋतु में आता है, जब मन को स्थिर कर साधना में लगाया जाता है।
शास्त्रों में वर्णित है कि इस अवधि में:
- एकादशी व्रत करने से मन शुद्ध होता है
- जप और ध्यान से आत्मबल बढ़ता है
- दान-पुण्य का फल कई गुना प्राप्त होता है
- नियमित पूजा से मानसिक शांति मिलती है
चातुर्मास व्रत के नियम (नियमावली)
अनेक श्रद्धालु चातुर्मास के दौरान विशेष नियमों का पालन करते हैं:
- प्याज और लहसुन का त्याग
- प्रत्येक एकादशी पर व्रत
- दैनिक तुलसी पूजन
- विष्णु सहस्रनाम पाठ
- सादा भोजन और सात्विक जीवनशैली
कुछ लोग संकल्प लेकर पूरे चार महीनों तक एक विशेष नियम का पालन करते हैं।
चातुर्मास में दान का महत्व
चातुर्मास 2026 के दौरान किया गया दान विशेष फलदायी माना गया है। इस समय:
- अन्नदान
- गौ सेवा
- वस्त्र दान
- धार्मिक ग्रंथ दान
इन कार्यों को आत्मशुद्धि और समाजसेवा का माध्यम माना जाता है।
चातुर्मास 2026 मुहूर्त मार्गदर्शन
- संकल्प मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व)
- एकादशी पूजन: सूर्योदय से पूर्वाह्न
- जन्माष्टमी पूजा: निशिता काल (मध्यरात्रि)
- तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी सायंकाल
मुहूर्त शहर के अनुसार बदल सकता है, अतः स्थानीय पंचांग देखना उचित है।
चातुर्मास पालन के लाभ
- आध्यात्मिक उन्नति
- मानसिक शांति
- पारिवारिक समृद्धि
- कर्म बाधाओं से मुक्ति
- भगवान विष्णु की कृपा
निष्कर्ष
चातुर्मास 2026 केवल तिथियों का काल नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और साधना का अवसर है। यदि श्रद्धा और अनुशासन के साथ इसका पालन किया जाए, तो जीवन में संतुलन और सकारात्मकता का अनुभव होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: चातुर्मास 2026 कब शुरू होगा?
उत्तर: 15 जुलाई 2026, देवशयनी एकादशी से।
प्रश्न 2: चातुर्मास 2026 कब समाप्त होगा?
उत्तर: 12 नवंबर 2026, देवउठनी एकादशी को।
प्रश्न 3: क्या चातुर्मास में विवाह होते हैं?
उत्तर: सामान्यतः इस अवधि में विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।
प्रश्न 4: चातुर्मास में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?
उत्तर: विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र।
प्रश्न 5: क्या सभी को चातुर्मास व्रत रखना आवश्यक है?
उत्तर: यह वैकल्पिक है, श्रद्धा अनुसार पालन किया जाता है।
प्रश्न 6: चातुर्मास में दान क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इस काल में दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
चातुर्मास 2026 कब से शुरू होगा और कब समाप्त होगा? यहां जानें देवशयनी एकादशी, देवउठनी एकादशी, एकादशी तिथियाँ, चातुर्मास व्रत नियम, दान का महत्व और पूरा पंचांग विवरण।
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