Sakat Chauth 2026 | सकट चौथ 2026 (संकष्टी / तिलकुट चौथ): पूर्ण जानकारी

तारीख: मंगलवार, 6 जनवरी 2026
व्रत तिथि (चतुर्थी): माघ मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी

📅 सकट चौथ कब है?

सकट चौथ का व्रत वर्ष 2026 में 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार इसका आरंभ सुबह 08:01 बजे से होगा और तिथि समाप्त होगी अगले दिन सुबह 06:52 बजे तक।

Sakat Chauth 2026 vrat puja with Lord Ganesha and moonrise on 6 January
Sakat Chauth 2026 vrat puja with Lord Ganesha and moonrise on 6 January

🌙 चंद्र उदय (Moonrise) — आज चाँद कितने बजे निकलेगा?

सकट चौथ 2026 को चाँद का उदय (चंद्रमा का दिखाई देना) लगभग 08:54 बजे शाम के आसपास है, इसी समय व्रत पारण किया जाता है।

  • नई दिल्ली – 08:54 पी एम
  • लखनऊ – 08:41 पी एम
  • पटना – 08:25 पी एम
  • कोलकाता –  08:15 पी एम
  • मुंबई – 09:23 पी एम
  • जयपुर – 09:02 पी एम
  • गाजियाबाद – 08:53 पी एम
  • रांची – 08:27 पी एम
  • जम्मू – 08:59 पी एम
  • कोटा – 09:04 पी एम
  • नोएडा – 08:54 पी एम

लखनऊ जैसे शहरों में जनवरी के आसपास चाँद अक्सर शाम के समय ही उभरता है (लगभग 7:30–8:30 बजे के बीच सामान्य आम रुझान के अनुसार), लेकिन व्रत पूर्ण होने का आधिकारिक समय पंचांग अनुसार ही मान्य है। :📖 सकट चौथ की कथा (व्रत कथा)

सकट चौथ व्रत को भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान गणेश ने अपने जीवन के संकटों का सामना बुद्धि और धर्म के मार्ग से किया। इसके चलते भक्तों का विश्वास है कि यह व्रत रखने से घर पर संकट, बाधाएँ और दुर्घटनाएँ दूर होती हैं।कथा यह भी बताती है कि माता-पिता की परिक्रमा करने से गणेश जी ने सिद्ध किया कि माँ-पिता के चरणों में ही सारा संसार वास करता है। इस दिन माता विशेष रूप से संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं। :

🙏 पूजा विधि और नियम

  • सबसे पहले गणेश वंदना से व्रत प्रारंभ करें।
  • पूजा में तिल (सेंव/काली तिल) और गुड़ का भोग लगाएँ।
  • चंद्र उदय के समय चाँद को अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।
  • अगर मौसम या बादल के कारण चाँद दिखाई न दे तो पंचांग के अनुसार समय पर पूजा और पारण करें।

 

🌼 सकट चौथ व्रत कथा

बहुत समय पहले की बात है। एक नगर में एक साहूकार और उसकी पत्नी रहते थे। वे बहुत धनी थे, परंतु धर्म और पुण्य में उनकी कोई आस्था नहीं थी। इसी कारण उनके कोई संतान नहीं थी। इस बात से साहूकारनी का मन भीतर ही भीतर दुखी रहता था।

एक दिन साहूकारनी अपने पड़ोस के घर गई। संयोग से उस दिन सकट चौथ थी। पड़ोसन भगवान गणेश की पूजा कर रही थी और सकट चौथ की कथा सुना रही थी।

साहूकारनी ने आश्चर्य से पूछा — “तुम यह क्या कर रही हो?”
पड़ोसन बोली — “आज सकट चौथ का व्रत है, इसलिए कथा सुन रही हूँ।”

तब साहूकारनी ने पूछा — “इस व्रत को करने से क्या फल मिलता है?”
पड़ोसन ने उत्तर दिया — “इस व्रत से अन्न, धन, सुहाग और पुत्र की प्राप्ति होती है।”

यह सुनकर साहूकारनी ने मन ही मन संकल्प किया और बोली —
“यदि मेरे गर्भ ठहर जाए, तो मैं सवा सेर तिलकुट चढ़ाकर सकट चौथ का व्रत करूँगी।”

भगवान गणेश की कृपा से कुछ समय बाद साहूकारनी गर्भवती हो गई। तब उसने वचन बढ़ाते हुए कहा —
“यदि मुझे पुत्र हुआ, तो मैं ढाई सेर तिलकुट चढ़ाऊँगी।”

कुछ समय पश्चात उसे एक पुत्र की प्राप्ति हुई। पुत्र के बड़े होने पर साहूकारनी ने फिर कहा —
“हे चौथ माता! जब मेरे बेटे का विवाह हो जाएगा, तब मैं सवा पाँच सेर तिलकुट अर्पित करूँगी।”

समय बीतता गया और पुत्र का विवाह तय हो गया। बारात निकली, फेरों की तैयारी हुई,
लेकिन साहूकारनी ने अपना वचन भुला दिया और तिलकुट नहीं चढ़ाया।

इससे चौथ माता कुपित हो गईं। उन्होंने फेरों के समय साहूकार के पुत्र को उठाकर पीपल के वृक्ष पर बैठा दिया
चारों ओर खोजबीन हुई, पर वर कहीं नहीं मिला। अंत में सब लोग निराश होकर लौट आए।

जिस कन्या से विवाह होना था, वह अपनी सहेलियों के साथ गणगौर पूजा के लिए जंगल में दूब लेने गई।
उसी समय पीपल के पेड़ से आवाज आई —
“ओ मेरी अर्धब्यहि!”

यह सुनकर कन्या भयभीत हो गई। घर लौटने के बाद वह दिन-प्रतिदिन सूखती और दुर्बल होने लगी।

एक दिन उसकी माँ ने कारण पूछा। तब कन्या ने पूरी बात बता दी।
माँ को शंका हुई और वह पीपल के वृक्ष के पास पहुँची। वहाँ जाकर देखा कि वह तो उसका होने वाला दामाद ही है —
मेहँदी लगी हुई, सेहरा बँधा हुआ।

कन्या की माँ ने पूछा — “तुम यहाँ क्यों बैठे हो?”
वर बोला — “मेरी माँ ने सकट चौथ पर तिलकुट का वचन दिया था, पर उसे पूरा नहीं किया।
इसी कारण चौथ माता ने मुझे यहाँ बैठा दिया।”

यह सुनकर कन्या की माँ साहूकारनी के घर पहुँची और पूछा —
“क्या तुमने सकट चौथ पर कोई व्रत या तिलकुट का संकल्प लिया था?”

साहूकारनी को सब याद आ गया। वह रोते हुए बोली —
“यदि मेरा बेटा सकुशल घर लौट आए, तो मैं ढाई मन तिलकुट चढ़ाऊँगी।”

उसकी सच्ची पश्चाताप भरी प्रार्थना से श्री गणेश भगवान प्रसन्न हो गए
उन्होंने उसके पुत्र को पुनः फेरों में बैठा दिया और विवाह धूमधाम से सम्पन्न हुआ।

जब पुत्र और बहू घर लौट आए, तब साहूकारनी ने पूरे विधि-विधान से
ढाई मन तिलकुट चढ़ाकर सकट चौथ का व्रत किया और प्रण लिया कि
अब वह जीवन भर यह व्रत करेगी।

इसके बाद पूरे नगर में तिलकुट के साथ सकट चौथ व्रत करने की परंपरा चल पड़ी।

हे सकट चौथ माता!
जिस प्रकार आपने साहूकारनी को उसके पुत्र और बहू से मिलाया,
उसी प्रकार हम सबके जीवन के संकट दूर करना।
इस कथा को कहने-सुनने वालों का सदा कल्याण करना।


🙏 जयकारा 🙏

बोलो सकट चौथ माता की जय!
विघ्न विनाशक श्री गणेश भगवान की जय!
संतान सुख देने वाली चौथ माता की जय!

📌 महत्व और श्रद्धा

सकट चौथ को माता-पिता विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि के लिए रखते हैं। यह व्रत संकटों को हरने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का शुभ अवसर माना जाता है।

चाँद का दर्शन व्रत पूर्णता का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। चंद्रमा के दर्शन के पश्चात ही व्रत पूर्ण माना जाता है।

💡 ध्यान दें: सटीक पंचांग समय और स्थान अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग या कालभोज मुहूर्त भी अवश्य देखें।

सकट चौथ 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

सकट चौथ 2026 कब है?

सकट चौथ का व्रत मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।

6 जनवरी 2026 को क्या है?

6 जनवरी 2026 को माघ मास की कृष्ण पक्ष की सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी) है।

सकट चौथ को चाँद कितने बजे निकलेगा?

6 जनवरी 2026 को चंद्रमा का उदय लगभग शाम 8:50 से 9:00 बजे के बीच होगा।

सकट चौथ को किस देवता की पूजा की जाती है?

इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है, इसलिए इसे गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है।

तिल चौथ और सकट चौथ में क्या अंतर है?

दोनों एक ही व्रत हैं, इसे तिल से बने भोग के कारण तिल चौथ भी कहा जाता है।

सकट चौथ का व्रत क्यों रखा जाता है?

यह व्रत संतान की लंबी आयु, स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा के लिए रखा जाता है।

क्या सकट चौथ को निर्जला व्रत होता है?

हाँ, अधिकतर महिलाएँ सकट चौथ का व्रत निर्जला रखती हैं।

अगर चाँद न दिखे तो क्या करें?

अगर बादलों के कारण चाँद न दिखे, तो पंचांग के अनुसार चंद्र उदय समय पर अर्घ्य देकर व्रत खोल सकते हैं।

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