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Join Our WhatsApp Channelॐ जय जगदीश हरे
आरती और संपूर्ण पूजा विधि
भक्ति का दिव्य प्रकाश
सनातन धर्म में 'ॐ जय जगदीश हरे' आरती का विशेष महत्व है। यह आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जो सृष्टि के पालनहार हैं। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि हृदय से निकली हुई प्रार्थना है जो भक्त को ईश्वर से जोड़ती है। इस आरती का पाठ करने से मन शांत होता है, सकारात्मकता का संचार होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए, इस पवित्र आरती के बोल और भगवान विष्णु की पूजा की संपूर्ण विधि को जानें ताकि आपकी भक्ति और भी गहरी हो सके।
श्री ॐ जय जगदीश हरे आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
जो ध्यावे फल पावे, दुख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी ।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी ।
परब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
दीन बंधु दुख हर्ता, तुम रक्षक मेरे ।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
तन-मन-धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा ।
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ ॐ जय जगदीश हरे...
भगवान विष्णु की संपूर्ण पूजा विधि
1. स्वयं की और पूजा स्थल की शुद्धि
पूजा आरंभ करने से पहले, स्वयं को और पूजा स्थल को शुद्ध करना अत्यंत आवश्यक है। सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल या सादे जल से पवित्र करें। एक चौकी पर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
2. संकल्प
पूजा का संकल्प लेना यानी ईश्वर के समक्ष अपनी इच्छा या उद्देश्य को बताना। दाहिने हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर अपनी मनोकामना व्यक्त करें और कहें, "हे प्रभु! मैं (अपना नाम) आज आपकी पूजा (मनोकामना) के लिए कर रहा हूँ, कृपया इसे स्वीकार करें।" इसके बाद जल को जमीन पर छोड़ दें।
3. दीप प्रज्वलन
एक मिट्टी का या धातु का दीपक लें, उसमें घी या तेल और बाती डालकर जलाएं। दीपक ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक है। इसे जलाने से पूजा स्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
4. गणपति पूजा
प्रत्येक शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से होती है। सर्वप्रथम गणेश जी को फूल, दूर्वा और लड्डू अर्पित करें। 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें। यह माना जाता है कि गणेश जी की पूजा करने से पूजा में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
5. आवाहन और आसन
भगवान विष्णु का आवाहन करें, 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते हुए उन्हें आसन ग्रहण करने का निवेदन करें। उन्हें चंदन का तिलक लगाएं और फूलों की माला पहनाएं।
6. पंचामृत स्नान और वस्त्र अर्पण
भगवान की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल का मिश्रण) से स्नान कराएं। फिर शुद्ध जल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछें। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र या मौली (कलावा) अर्पित करें।
7. भोग और दक्षिणा
पूजा में फल, मिठाई, तुलसी दल और पंचामृत का भोग लगाएं। तुलसी दल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए भोग में इसे अवश्य शामिल करें। भोग लगाने के बाद धूप और अगरबत्ती जलाएं। दक्षिणा के रूप में कुछ रुपए भी अर्पित किए जा सकते हैं।
8. आरती
पूजा के अंत में 'ॐ जय जगदीश हरे' आरती करें। आरती करते समय पूरे भक्ति भाव से गाएं और घंटी बजाएं। आरती करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और वातावरण शुद्ध होता है।
9. मंत्र जाप और परिक्रमा
आरती के बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे 'विष्णु गायत्री मंत्र' या 'महामंत्र'। इसके बाद अपनी जगह पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें।
10. क्षमा प्रार्थना
पूजा समाप्त होने के बाद, भगवान से जाने-अनजाने में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें। प्रार्थना करें कि भगवान आपकी पूजा को स्वीकार करें और आपकी मनोकामना पूरी करें। अंत में सभी को प्रसाद वितरित करें।
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