श्री गणेश जी की आरती
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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश...
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश...
अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश...
'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
आरती का महत्व
श्री गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी आराधना करना आवश्यक माना गया है। आरती करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सफलता, समृद्धि एवं सुख की प्राप्ति होती है।
गणेश जी की आरती के लाभ
- घर-परिवार में सुख और शांति आती है।
- व्यवसाय और कार्यों में सफलता मिलती है।
- सभी प्रकार के विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं।
- भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कब करें आरती?
प्रतिदिन सुबह और शाम, विशेषकर गणेश चतुर्थी, बुधवार और किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में गणेश जी की आरती करनी चाहिए। दीपक, धूप, नैवेद्य और श्रद्धा के साथ आरती करने से भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
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